बैतूल में लाल वर्दी वाली के हाथ हुए पीले
बैतूल । बैतूल की एक शादी चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां की एकमात्र कुली की शादी खास रही। रेलवे प्रतीक्षालय पर उसने फेरे लिए और रेलवे स्टाफ ने भी रस्में निभाने में मदद की। सांसद दुल्हन को हल्दी लगाने पहुंचे तो विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने शादी में उत्साह से भाग लिया।दरअसल हम बात कर रहे हैं कि बैतूल रेलवे स्टेशन की एकमात्र कुली दुर्गा बोरकर की। परिवार का बोझ उठाने कुली बनकर जी रही दुर्गा शादी की उम्मीद छोड़ चुकी थी, पर अब हाथ पीले हुए तो बहुत खुश है। उसकी खुशी इस बात की भी है कि जहां वो काम करती थी, वहीं से उसके नए जीवन की शुरुआत हुई। साथ या आसपास काम करने वाले लोग शामिल हुए तो खुशी कई गुना बढ़ गई। बुधवार की रात बैतूल रेलवे स्टेशन के यात्री प्रतीक्षालय में महिला कुली दुर्गा बोरकर की शादी की कुछ रस्में पूरी की गईं। 29 फरवरी को दुर्गा और सुरेश की शादी रेलवे स्टेशन पर स्थित कल्याण केंद्र में धूमधाम से हुई। दोनों ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के सामने शादी की। विधायक हेमंत खंडेलवाल और भाजपा जिला अध्यक्ष आदित्य शुक्ला भी मेहमान बने और उन्होंने वर वधू को आशीर्वाद दिया।
संघर्ष भरा रहा दुर्गा का जीवन
बता दें कि महिला कुली दुर्गा बोरकर की पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं है। दरअसल दुर्गा के पिता भी रेलवे स्टेशन पर कुली का काम किया करते थे। जिन पर तीन बेटियों के पालन पोषण का जिम्मा था। बढ़ते समय के साथ उनके स्वास्थ्य ने उनका साथ नहीं दिया और उनका काम बंद हो गया। इसके बाद परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी दुर्गा ने अपने जिम्मे ले ली। दुर्गा के लिए सफर आसान तो नहीं था, सबसे पहले उसे अपने पिता का बिल्ला पाने के लिए रेल विभाग के चक्कर लगाने पड़े और फिर वर्ष 2011 में दुर्गा के संघर्ष की जीत हुई और उसे अपने पिता का बिल्ला मिल गया। इसके बाद दुर्गा ने बैतूल रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करना शुरू कर दिया और दुर्गा बोरकर बैतूल की एकमात्र महिला कुली हैं।

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