छिंदवाड़ा | अखण्ड प्रताप सिंह 

छिंदवाड़ा जिले के मोहखेड़ तहसील में प्रशासनिक अनुशासन को चुनौती देते हुए एक गंभीर मामला सामने आया है। तहसील कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 बाबू अरविंद डोंगरे को जिला कलेक्टर द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के तहत अन्य तहसील में पदस्थ किया गया था, लेकिन इसके बावजूद वे अब तक मोहखेड़ तहसील में ही कुर्सी पर बने हुए हैं।

कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी आदेश क्रमांक 1/307886/2025, दिनांक 6 जून 2025 को साफ तौर पर श्री सागर उइके को मोहखेड़ तहसील में पदस्थ किया गया है। इसके बावजूद पुराने बाबू श्री डोंगरे कार्यमुक्त नहीं हुए हैं और नवनियुक्त कर्मचारी को कार्यभार ग्रहण नहीं करने दिया जा रहा है।

परिवारवाद और प्रभाव का आरोप

सूत्रों की मानें तो श्री डोंगरे का स्थायी निवास मोहखेड़ में ही है, और वे वर्षों से यहीं जमे हुए हैं। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने अपने साले और भतीजे को भी तहसील कार्यालय में अनाधिकारिक रूप से रखा हुआ है, जिससे उन्हें निजी और पारिवारिक लाभ मिल रहा है।

स्थानीय नागरिकों और कर्मचारियों का कहना है कि बाबूजी का मोहखेड़ में जबरदस्त प्रभाव है और उन्होंने तहसील को अपनी “बपौती” बना रखा है। कार्यों में पारदर्शिता की कमी, मनमानी और आदेशों की अनदेखी अब आम बात हो चुकी है।

जनता और कर्मचारियों में रोष

इस पूरी घटना को लेकर जनता में असंतोष है और अन्य कर्मचारी भी असहाय महसूस कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर कलेक्टर जैसे शीर्ष अधिकारी के आदेश की इस तरह अवहेलना होगी तो शासन-प्रशासन की साख पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब प्रशासन की बारी

यह मामला केवल एक ट्रांसफर का नहीं, बल्कि सरकारी अनुशासन, नियमों की पवित्रता और भ्रष्टाचार से जुड़ा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब और कितना कठोर रुख अपनाता है।