UPI चार्ज पर बढ़ी चर्चा, RBI गवर्नर बोले- यह है सरकार की मंशा
व्यापार : क्या यूपीआई सेवा हमेशा मुफ्त बनी रहेगी? बुधवार को एमपीसी के फैसलों के एलान के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान आरबीआई के गवर्नर ने इस पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आशंका जताई कि यूपीआई हमेशा के लिए मुफ्त नहीं रह सकती, क्योंकि किसी न किसी को तो समय के साथ डिजिटल पेंमेंट सिस्टम को चलाने का खर्च उठाना पड़ेगा।
किसी न किसी को उठाना पड़ेगा यूपीआई के संचालन का खर्च
एमपीसी के फैसलों के एलान के बाद आरबीआई गवर्नर ने साफ किया, "मैंने कभी नहीं कहा कि यूपीआई हमेशा मुफ्त रहेगा। मैंने केवल इतना कहा था कि इसके संचालन से जुड़े खर्च हैं, और किसी न किसी को तो इस खर्च को उठाना पड़ेगा। भुगतान कौन करेगा यह महत्वपूर्ण है, पर भुगतान कौन कर रहा है, इससे ज्यादा महत्पूर्ण नहीं है। इसलिए हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि इस मॉडल की स्थिरता के लिए कोई सामुहिक रूप से या व्यक्तिगत रूप से इसके संचालन का भुगतान करे।" मल्होत्रा का यह बयान ऐसे समय पर समाने आया है जब यूपीआई इकोसिस्टम पर चार्ज लगने से जुड़ी कुछ रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि आईसीआईसीआई बैंक देश का पहला बैंक होगा जो औपचारिक रूप से यूपीआई भुगतान के लिए अपने पेमेंट एग्रीगेटर्स से 1 अगस्त 2025 से चार्ज वसूलने जा रहा है। हालांकि, बैंक ने अब तक इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। सूत्रों ने दावा किया है कि आईसीआईसीआई बैंक ने जून के आखिर में अपने पेमेंट एग्रीगेटर्स को नए फी स्ट्रक्चर के बारे में सूचना दी थी।
यूपीआई पर अहम बदलावों से जुड़ी खबर के बीच आरबीआई गवर्नर की टिप्पणी
सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि बैंक एस्क्रो खातों का संचालन करने वाले अपने पेमेंट एग्रीगेटर्स से चार्ज के रूप में दो आधार अंकों की (100 रुपये के लेनदेन पर दो पैसे) वसूली कर रही है। इसकी अधिकतम सीमा एक लेनदेन पर 6 रुपये रखी गई है। वहीं, गैर एस्क्रो वाले खातों का संचालन करने वाले पेमेंट एग्रीगेटर्स से 4 बेसिस प्वाइंट और अधिकतम 10 रुपये वसूला जा रहा है। हालांकि, आईसीआईसीआई बैंक के मार्चेंट खातों के जरिए होने वाले लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं लगाने की खबरें हैं। हालांकि, फिलहाल, ग्राहकों और कारोबारियों कोई भी चार्ज नहीं वसूला जा रहा है।
गवर्नर पहले बोल चुके- मुफ्त यूपीआई लंबे समय तक के लिए टिकाऊ नहीं
इससे पहले जुलाई में बीएफएसआई समिट के दौरान यूपीआई पर चार्ज लगाने के विषय पर बोलते हुए आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने कहा था कि मुफ्त यूपीआई लंबे समय तक के लिए टिकाऊ नहीं है। यह एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना है। सरकार का मानना है कि यह सुविधा मुफ्त में मिलनी चाहिए और वह इसके लिए सब्सिडी दे रही है। डिजिटन पेमेंट्स के बारे में बोलते हुए आरबीआई गवर्रनर ने कहा था कि मेरी नजर में इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार केवल जून महीने में ही 18.4 अरब यूपीआई लेनदेन हुए और इसमें सालाना आधार पर 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
किसी भी सेवा की लागत का होना चाहिए भुगतान: संजय मल्होत्रा
आरबीआई गवर्नर ने कहा, "महत्वपूर्ण बात यह है कि यूपीआई, या कोई भी अन्य भुगतान प्रणाली, सुलभ, सस्ती, सुरक्षित और टिकाऊ हो...और यह तभी टिकाऊ होगी जब कोई इसकी लागत वहन करेगा। इसलिए जब तक यह सरकार है या कोई और- यह इतना महत्वपूर्ण नहीं है- महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी सेवा की लागत का भुगतान किया जाना चाहिए, चाहे वह सामूहिक रूप से हो या उपयोगकर्ता की ओर से।" आरबीआई गवर्नर ने स्वीकार किया कि वर्तमान प्रणाली पूरी तरह से सरकार की ओर से मिल रही सब्सिडी पर टिकी है। बैंकों और अन्य हितधारकों पर इतने बड़े पैमाने पर लेनदेन के लिए कोई प्रत्यक्ष लागत भार नहीं पड़ता है।

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