एमपी में 'लव जिहाद' के सबसे ज्यादा मामले इंदौर से, 283 में 73 केस यहीं दर्ज
भोपाल: एमपी में करीब 20 सालों से बीजेपी की सरकार है। इसके बावजूद लव जिहाद के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जनवरी 2020 से 15 जुलाई 2024 तक एमपी में लव जिहाद के 283 मामले दर्ज किए गए है। एमपी विधानसभा में यह जानकारी दी गई है। ये मामले मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत दर्ज किए गए हैं। सबसे अधिक मामले इंदौर और भोपाल में आए हैं। बीजेपी विधायक आशीष गोविंद शर्मा के सवाल के जवाब में यह डेटा पेश किया गया है।
बीजेपी विधायक ने पूछा एमपी में लव जिहाद के कितने केस?
दरअसल, यह सवाल बीजेपी विधायक आशीष गोविंद शर्मा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से पूछा था। उन्होंने पूछा था कि 2020 से मध्य प्रदेश में लव जिहाद के कितने मामले सामने आए हैं। सीएम मोहन यादव के पास गृह विभाग भी है। शर्मा ने यह भी जानकारी मांगी थी कि कितने मामले में पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज की गई है। साथ ही कितने मामलों में लड़के-लड़कियों की उम्र 18 साल से कम है।
सीएम ने दिया यह जवाब
मुख्यमंत्री ने जवाब में बताया कि मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021, 27 मार्च, 2021 को लागू हुआ था। यह कानून राज्य को जबरन या धोखे से किए गए धर्म परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देता है। खासकर उन मामलों में जहां महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं। इन मामलों की जांच के लिए पुलिस मुख्यालय ने 4 मई को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इसका मकसद है कि कानून को सख्ती से लागू किया जा सके।
राज्य में कुल 283 केस दर्ज हुए
वहीं, राज्य के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में कुल 283 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से 197 मामले अदालतों में चल रहे हैं। सबसे ज्यादा मामले इंदौर में दर्ज हुए हैं। इंदौर में मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत 74 मामले दर्ज किए गए हैं। भोपाल में 33 मामले दर्ज हुए हैं। इस तरह, इन दो बड़े शहरों में राज्य के कुल मामलों का 40 प्रतिशत हिस्सा है। खंडवा और उज्जैन में 12-12 मामले दर्ज हुए हैं। छतरपुर में मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत 11 मामले दर्ज किए गए हैं।
10 साल की जेल का प्रावधान
इस कानून के तहत दोषियों को 10 साल तक की जेल और एक लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। यह कानून सामूहिक धर्म परिवर्तन पर भी लागू होता है। इस कानून के अनुसार, जो भी धर्म परिवर्तन करना चाहता है, उसे जिला मजिस्ट्रेट को 60 दिन पहले एक घोषणा पत्र देना होगा।

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