अगर बच्चा किताबें नहीं खोलता, तो घर के इस कोने में लगाएं ये खास फोटो, जानिए सही दिशा और सही विजुअल ट्रिक
कई पेरेंट्स ये कहते नहीं थकते कि उनके बच्चे पढ़ाई में ध्यान नहीं दे रहे हैं. कोई कहता है बच्चा किताब खोलता ही नहीं, तो कोई शिकायत करता है कि नंबर अच्छे नहीं आ रहे हैं. मगर क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चों का पढ़ाई में मन क्यों नहीं लगता? इसका जवाब सिर्फ बच्चों में नहीं, घर के माहौल में भी छिपा हो सकता है, अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा बिना ज़्यादा टोके खुद पढ़ाई करे और उसमें दिलचस्पी भी ले, तो आपको सिर्फ एक छोटी सी उपाय करना है, इस ट्रिक में न तो कोई ट्यूशन की ज़रूरत है, न डांटने की सिर्फ एक फोटो, और आपके बच्चे का फोकस बदल सकता है
लाइब्रेरी की एक फोटो, पढ़ाई में कमाल कर देगी
अब आप सोच रहे होंगे कि एक फोटो कैसे किसी बच्चे की पढ़ाई की आदत को बदल सकती है? चलिए आसान भाषा में समझते हैं.
आपको करना ये है कि सबसे पहले अपने फोन या लैपटॉप पर Google पर जाएं और वहां “Library” लिखकर इमेज सर्च करें. अब जो फोटो सबसे ज़्यादा अच्छी लगे – जिसमें चारों तरफ किताबें हों, पढ़ने का माहौल हो उसे डाउनलोड कर लें.
इसके बाद उस फोटो का एक अच्छा सा कलर प्रिंट आउट निकलवाएं. अब बात आती है कि उस फोटो को घर में कहां लगाया जाए, क्योंकि ये सबसे ज़रूरी स्टेप है.
क्यों ज़रूरी है वेस्ट-साउथ-वेस्ट डायरेक्शन?
वास्तु के अनुसार पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा यानी वेस्ट-साउथ-वेस्ट पढ़ाई और ज्ञान से जुड़ी दिशा मानी जाती है. यही वो कोना होता है, जहां अगर आप सही चीज़ें लगाएं, तो बच्चा पढ़ाई की तरफ खुद-ब-खुद आकर्षित होता है.
अब आपने जो लाइब्रेरी की फोटो प्रिंट करवाई है, उसे जाकर घर के वेस्ट-साउथ-वेस्ट वाले हिस्से में लगा दीजिए. अगर वहां जगह है तो आप बच्चे की स्टडी टेबल भी उसी कोने में शिफ्ट कर सकते हैं.
ये बदलाव ना सिर्फ माहौल को पढ़ाई वाला बनाएगा, बल्कि बच्चे के मन में खुद-ब-खुद पढ़ने का मन भी पैदा करेगा.
सिर्फ फोटो नहीं, ये है मनोवैज्ञानिक ट्रिक
ये ट्रिक सिर्फ वास्तु या मान्यताओं पर आधारित नहीं है. इसके पीछे एक गहरी मनोवैज्ञानिक वजह भी है. जब बच्चा रोज़ एक ऐसी फोटो देखता है जिसमें किताबें भरी पड़ी हैं, लोग पढ़ रहे हैं, तो उसका दिमाग उस माहौल को धीरे-धीरे अपनाने लगता है, ये एक तरह का विजुअल मोटिवेशन होता है, जो अंदर ही अंदर बच्चे के मन को पढ़ाई के लिए तैयार करता है.
डांट की जगह समझदारी अपनाइए
बच्चों को हर बार डांटना या ज़बरदस्ती पढ़ाना काम नहीं आता हैं. कभी-कभी ज़रूरत होती है बस माहौल बदलने की, सोच बदलने की एक सही दिशा में लगाया गया एक छोटा सा विजुअल बच्चे की सोच को सकारात्मक बना सकता है.

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