राशि अनुसार पहनें कछुए की अंगूठी! किस उंगली और किस दिन में पहनें?
आजकल हम में से कई लोग सौभाग्य और आर्थिक समृद्धि के लिए अपने हाथों में कछुए की अंगूठी पहनते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी इस कछुए की अंगूठी को पहनने वाले व्यक्ति पर इसका उल्टा असर भी हो सकता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कछुए की अंगूठी पहनने के कुछ खास नियम होते हैं और इन्हीं नियमों का ध्यान में रखते हुए अंगूठी पहनी जाए तो इसका जबरदस्त फायदा मिलता है. हममें से कई लोग सड़क किनारे या छोटी-मोटी दुकानों से कछुए वाली अंगूठियां खरीदकर पहन लेते हैं. जानकारी कम होने की वजह से कई बार लोग यह नहीं देख पाते कि वह अंगूठी किस धातु की बनी है या फिर किस दिन पहन रहे हैं. आइए जानते हैं कछुए की अंगूठी धारण करते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए…
कछुए की अंगूठी पहनने के लाभ
ज्योतिष शास्त्र में कछुआ को बहुत ही भाग्यशाली माना गया है और यह जीवन में सुख, समृद्धि, धन और सौभाग्य लाता है. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि कछुए की अंगूठी का संबंध देवी लक्ष्मी से है और सही समय देखकर इस अंगूठी को धारण किया जाए तो हमेशा माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. कछुए की अंगूठी वास्तु और ज्योतिष दोनों में शुभ मानी जाती है, लेकिन इसे पहनने की विधि और नियम ध्यानपूर्वक पालन करना अत्यंत आवश्यक है.
कछुए की अंगूठी पहनने वाले को जीवन में हर तरह की खुशियां मिलेंगी और आर्थिक तंगी भी दूर होगी. कछुए को शांति और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस अंगूठी को पहनने वाले में धैर्य की भावना अधिक होगी और जीवन में शांति बनी रहेगी. इस अंगूठी के धारण करने से धन से संबंधित समस्या दूर होंगी और नौकरी व बिजनस में सफलता भी मिलती है.
कछुए की अंगूठी का मुख इस तरफ रखें
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कछुए की अंगूठी पहनते समय ध्यान रखें कि कछुए का मुख हमेशा आपकी ओर हो. तभी धन आपकी ओर आकर्षित होगा और जीवन में सुख-समृद्धि आएगी. अगर मुख बाहर की ओर होगा, तो धन पानी की तरह बहेगा. शास्त्रों में केवल चांदी की कछुए की अंगूठी को मान्यता दी गई है, क्योंकि यह चंद्रमा, बुध और लक्ष्मी का प्रतिनिधित्व करती है.
उतारने के बाद फिर से इस तरह धारण करें
कछुए वाली अंगूठी को उतारने के बाद दोबारा पहनने के भी कुछ नियम हैं. इस अंगूठी को कहीं भी नहीं रखा जा सकता. उतारने के बाद अंगूठ को मंदिर में देवी लक्ष्मी के चरणों में रखना होता है. इसके बाद अगले दिन स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें. फिर अंगूठी को दूध से भरे बर्तन में रखें और फिर देवी लक्ष्मी के चरणों में रखकर दोबारा पहन लें. पहनने के बाद ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 बार जप करें.
कछुए की अंगूठी इस दिन पहनें
कछुए की अंगूठी केवल राइट हेंड साइन की मिडिल फिंगर में ही पहनी जा सकती है. अंगूठी को केवल शुक्रवार के दिन शुभ मुहूर्त में पहनना शुभ माना जाता है क्योंकि शुक्रवार का दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और भौतिक सुख सुविधा के स्वामी शुक्र ग्रह को समर्पित है. शुक्रवार के दिन शुभ मुहूर्त में धारण करने से धन संपदा में बढ़ोतरी होती है और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद भी बना रहता है.
इन राशि वाले सलाह लेकर पहनें
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों को बिना ज्योतिषी की सलाह के कछुए की अंगूठी नहीं पहननी चाहिए. अगर इन राशियों के लोग कछुए की अंगूठी पहनते हैं, तो वे ग्रह दोषों के शिकार हो सकते हैं और उन्हें नुकसान होने लगता है. सिंह और तुला राशि के लोगों को अपनी कुंडली बनवाने के बाद ही कछुए की अंगूठी पहननी चाहिए.
इस तरह करें धारण
बाजार से खरीदी हुई कछुए वाली अंगूठी को बिना शुद्ध किए पहन लेना अशुभ होता है. पहनने से पहले अंगूठी को गंगाजल, दूध, शुद्ध जल, शहद, घी आदि से पंचामृत से पवित्र करें. फिर उसे धूप-दीप दिखाकर लक्ष्मी मंत्र या कछुए के बीज मंत्र से अभिमंत्रित करें.

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