“कटप्पा ने बाहुबली को इसलिए मारा – सत्या राज बोले ‘राजामौली ने कहा, इसलिए मारा’”
10 जुलाई 2015 को जब मशहूर साउथ डायरेक्टर एस एस राजामौली की ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो किसी ने नहीं सोचा था कि ये सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि इंडियन सिनेमा में एक नई क्रांति लाने वाली फिल्म बनने जा रही है। इस फिल्म के रिलीज होने के बाद इसने जबरदस्त कलेक्शन किया था। आज जब इस फिल्म को रिलीज हुए 10 साल पूरे हो गए हैं, तो आइए जानते हैं इससे जुड़े कुछ दिलचस्प, हैरान कर देने वाले और मजेदार किस्से।
कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?
फिल्म के सबसे चर्चित सवाल 'कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?' ने दर्शकों को दो साल तक बेचैन रखा था। लेकिन हैरानी की बात ये है कि फिल्म की शूटिंग के वक्त खुद कटप्पा का किरदार निभा रहे सत्यराज और प्रभास को भी इसका जवाब नहीं बताया गया था। राजामौली ने खुद ये राज छुपाकर रखा ताकि इसकी गोपनीयता बनी रहे और दर्शकों में उत्सुकता बनी रहे।
प्रभास ने 5 साल तक कोई और फिल्म साइन नहीं की
एक आम अभिनेता साल में दो-तीन फिल्में करता है, लेकिन 'बाहुबली' के लिए प्रभास ने अपने करियर का बहुत बड़ा रिस्क लिया। उन्होंने पूरे 5 साल तक कोई दूसरी फिल्म नहीं की और खुद को पूरी तरह इस किरदार में झोंक दिया। उन्होंने फिजिकल ट्रेनिंग, मार्शल आर्ट्स और तलवारबाजी में खुद को निखारा, ताकि वो बाहुबली जैसे योद्धा को पूरी तरह से जी सकें।
राणा दग्गुबाती एक आंख से देख नहीं सकते
'बाहुबली' में भल्ललादेव का किरदार निभाने वाले राणा दग्गुबाती असल जिंदगी में एक आंख से देख नहीं सकते। उन्होंने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि वो जन्म से ही एक आंख से अंधे हैं, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उनकी मेहनत और समर्पण इस किरदार में साफ झलकती है।
30 किलो का असली कवच पहनते थे अभिनेता
फिल्म के फाइटिंग सीन्स की वास्तविकता बनाए रखने के लिए कलाकारों ने असली धातु से बने भारी कवच पहने। प्रभास का कवच लगभग 30 किलो का था और तलवारें भी असली धातु की थीं। इसके बावजूद उन्होंने बिना शिकायत के हर दृश्य को पूरी एनर्जी के साथ शूट किया और पता भी नहीं चलने दिया कि उन्होंने इतना भारी कुछ पहन रखा है।
कहानी राजामौली के पिता ने लिखी थी कहानी
‘बाहुबली’ की कहानी विजयेंद्र प्रसाद, यानी राजामौली के पिता ने लिखी थी। उन्होंने 'महाभारत' और 'रामायण' से प्रेरणा लेते हुए एक नई दुनिया ‘महिष्मती’ और उसके किरदारों को गढ़ा। उन्होंने पहले यह कहानी एक उपन्यास के तौर पर लिखी थी, लेकिन बाद में राजामौली ने इसे फिल्मी रूप दिया।
उस समय की सबसे महंगी साउथ इंडियन फिल्म
जब ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ बनी, तब ये लगभग 180 करोड़ की लागत से बनी सबसे महंगी साउथ फिल्म थी। इसका VFX वर्क अकेले सिर्फ 85 करोड़ में किया गया। फिल्म की भव्यता और विजुअल इफेक्ट्स देखकर दर्शक हैरान रह गए थे।
भाला फेंकने वाला सीन बना था वाटरमेलन से!
फिल्म में बाहुबली द्वारा भाला फेंकने वाला एक सीन VFX टीम की एक अलग ही क्रिएटिव सोच का नतीजा था। उस दृश्य के प्रभाव को टेस्ट करने के लिए टीम ने वाटरमेलन पर प्रैक्टिस की थी, ताकि कैमरे पर वो सीन एकदम असली लगे।
कटप्पा का रोल पहले मोहनलाल को ऑफर हुआ था
कटप्पा के इस किरदार के लिए पहले मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल से संपर्क किया गया था। लेकिन व्यस्त शेड्यूल के चलते उन्होंने यह ऑफर ठुकरा दिया। बाद में ये किरदार सत्यराज को मिला, जिन्होंने इसे यादगार बना दिया।
महिष्मती साम्राज्य का सेट बना था 300 कलाकारों के साथ
फिल्म का काल्पनिक साम्राज्य ‘महिष्मती’ किसी सपने की दुनिया जैसा लगता है। इसे बनाने के लिए 300 से अधिक आर्टिस्ट्स ने 200 दिनों तक मेहनत की। हर पत्थर, दीवार, महल को बारीकी से डिजाइन किया गया था।
नेटफ्लिक्स ने बनाया था बाहुबली का प्रीक्वल
बाहुबली की लोकप्रियता को देखते हुए नेटफ्लिक्स ने इसका एक प्रीक्वल शो ‘बाहुबली: बिफोर द बिगिनिंग’ शुरू किया था। हालांकि यह सीरीज तकनीकी और प्रोडक्शन कारणों से रिलीज नहीं हो पाई, लेकिन इससे साफ है कि ये ब्रांड कितना ताकतवर बन चुका है।

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