श्रीकृष्ण के देह त्यागने के बाद देवी रुक्मिणी और अन्य पत्नियों का क्या हुआ?
भगवान विष्णु का 8वां अवतार और 16 कलाओं के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण का एक श्राप की वजह से देह त्यागना पड़ा, या फिर ये कहें कि कृष्णजी का पृथ्वी लोक पर समय पूरा हो गया था इसलिए उनको वापस बैकुंठ धाम जाना पड़ा. पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रीकृष्ण को जरा नामक एक बहेलिए ने पैर में तीर मारा दिया था. दरअसल श्रीकृष्ण के तलवे पर पद्म चिन्ह था और जिस समय बहेलिये ने उनके तलवे पर तीर चलाया, वे पैर पर पैर रख कर लेटे हुए थे और उनके पैर स्वर्ण मृग की तरह चमक रहे थे. वही पैर दूर से देखने पर हिरण लग रहे था, जिसकी वजह से बहेलिए ने तलवे पर तिर मार दिया. तलवे पर लगे तीर की वजह से श्रीकृष्ण देह त्यागकर बैंकुंठ धाम चले गए.
महाभारत युद्ध के बारे में तो हम सभी जानते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि श्रीकृष्ण जब अपने धाम वापस चले गए थे, तब द्वारका नगरी और उनकी पटरानियों का क्या हुआ. श्रीकृष्ण के धाम जाने के बाद क्या उनकी पत्नियां भी धाम चली गई थीं. आइए विस्तार से जानते हैं इस कथा के बारे में…
अर्जुन ने किया अंतिम संस्कार
श्रीकृष्ण जब देह त्यागकर चले गए थे, तब द्वारका समुद्र में समा गई और कृष्ण के सभी पुत्र गृहयुद्ध में मारे गए, जिसने यादव वंश के पूर्ण विनाश का कारण बना. श्रीकृष्ण की बसाई द्वारका नगरी और उनके वंशज की ऐसी हालात देखकर अर्जुन काफी रोने लगे. अर्जुन ने ही श्रीकृष्ण और अन्य सभी यदुवंशियों का अंतिम संस्कार भी किया. रुक्मिणी और जाम्बवंती श्रीकृष्ण की चिता में प्रवेश कर सती हो गईं. वहीं सत्यभामा ने वन में जाकर गुरुओं और ऋषियों से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया. उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के ध्यान में लीन होकर तपस्या की और अंततः उनके लोक को प्राप्त किया. श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम की पत्नी रेवती ने भी देह त्याग कर दिया. अर्जुन जब द्वारका से निकले तब श्रीकृष्ण की अन्य पत्नियां और बाकी यदुवंशियों की स्त्रियां भी खुद के पास बचा हुआ धन रखकर अर्जुन के साथ चल दीं.
लालसा से भरे हुए थे लोग
जब जानकारी मिली की अर्जुन के पास काफी मात्रा में धन दौलत है तो रास्ते में गांव के लोगों और लुटेरों का जमावाड़ा लगने लगा. अर्जुन महिलाओं और धन-संपदा के साथ निकलने लगे लेकिन सभी लोग धन को देख देखकर ललचाने लगे. उस समय अर्जुन अकेले थे और चारों तरफ लालसा और ईर्ष्या से भरे हुए लोग मौजूद थे, जो धन और महिलाओं को लूटना चाहते थे. जैसे जैसे अर्जुन आगे बढ़ते, उनके साथ साथ गांव वाले और लुटेरे भी आगे चलने लगे. हालांकि लुटेरे खुद अर्जुन के डर की वजह से आगे नहीं जाना चाहते थे इसलिए उन्होंने गांव वालों को धन और स्त्रियों का लालच दिया था. लेकिन अर्जुन इस बात से पूरी तरह अनजान थे कि ये लोग हमला कर देंगे इसलिए वे बेफ्रिक होकर चलते गए.
पूरी तरह विफल रहे अर्जुन
रास्ते में ग्रामीणों का साथ मिलकर लुटेरों ने अर्जुन और महिलाओं पर हमला बोल दिया और लूटपान करने लगे. अर्जुन सभी से लड़ने का प्रयास कर रहे थे लेकिन लुटेरों की संख्या बहुत ज्यादा थी. चारों तरफ लूटपाट देखकर अर्जुन को क्रोध आया और उन्होंने गांडीव उठा लिया और लुटरों पर दिव्य बाणों का प्रयोग करना चाहा लेकिन अर्जुन से कोई अस्त्र चल ही नहीं रहा था. अर्जुन मंत्र बोल बोल बोलकर दिव्याशास्त्र बुला रहे थे लेकिन कोई दिव्याशास्त्र प्रकट ही नहीं हुआ. अर्जुन का गांडीव भी सामान्य धनुष के जैसा बन गया था और अर्जुन के द्वारा किए गए सभी प्रयास विफल हो गए. अर्जुन अपने आसपास बेबस होकर देखते रह गए और वह महिलाओं और धन-संपदा को लूटकर ले गए.

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