हमारे देश की पहचान सिंधु घाटी से जुड़ी- मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे देश की पहचान सिंधु घाटी सभ्यता और सिंधु नदी से जुड़ी हुई है। प्राचीन काल में विकसित सिंधु घाटी सभ्यता आज भी पूरे देश को गौरवान्वित करती है। सम्राट दाहिर सेन का अपने धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए किया गया संघर्ष आज भी हमें प्रेरणा और साहस देता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित और प्रतिबद्ध हैं। भोपाल संत हिरदाराम की पावन भूमि है, संत परंपरा के अनुसार हम "जियो और जीने दो" के सिद्धांत पर विश्वास करते हैं और सभी जीवों के प्रति प्रेम की भावना का भी पालन करते हैं। इन मूल्यों का पालन करते हुए सिंधी समाज ने अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना घर, परिवार और कारोबार छोड़ दिया। संघर्ष और चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से खुद को फिर से स्थापित भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंधु भवन में आयोजित चेटीचंड महोत्सव और प्रतिभा सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक श्री भगवान दास सबनानी ने की। इस अवसर पर मध्यप्रदेश सिंधु भवन ट्रस्ट के पदाधिकारी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपनी योग्यता, क्षमता और सतत परिश्रम से सिंधी समाज ने व्यापार एवं उद्योग जगत में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य सरकार प्रदेश में स्थानीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों एवं उद्यमिता के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उद्योगों की स्थापना एवं व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए नीतियों एवं प्रक्रियाओं को सरल एवं सुगम बनाया गया है। प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। व्यापार एवं उद्योग रोजगार उपलब्ध कराने का प्रमुख साधन है। अन्य राज्यों एवं विदेशों से भी उद्योगपतियों एवं व्यवसायियों को निवेश के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंधी समाज के बंधुओं से प्रदेश में व्यापार एवं औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए पहल करने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में हर संभव सहयोग के लिए तैयार है। विधायक श्री भगवान दास सबनानी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से राजा दाहिर सेन, संत कंवर दास और शहीद हेमू कालाणी की कहानियों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने, प्रदेश के सिंधी समाज बाहुल्य शहरों में शहीद हेमू कालाणी की प्रतिमा स्थापित करने, सिंधी संग्रहालय के लिए भूमि उपलब्ध कराने और सिंधी अकादमी का बजट बढ़ाने का आग्रह किया।

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