अमेरिका का टैरिफ धमाका: चीन समेत 60 देशों पर बढ़ा शुल्क, हर दिन कमा रहे 2 बिलियन डॉलर
अमेरिका: अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी को लेकर पूरी दुनिया के अर्थ जगत में हड़कंप जैसी स्थिति देखी गई. चीन ने जब अमेरिका का विरोध किया, तो दोनों देशों के बीच टैरिफ वॉर छिड़ गया. हालांकि जिन देशों ने अमेरिकी टैरिफ नीति पर जवाबी कार्रवाई नहीं की, उसके लिए अमेरिका ने 90 दिनों की छूट की घोषणा की. हालांकि इस दौरान भी इन देशों पर 10% टैरिफ लगता ही रहेगा. टैरिफ को लेकर हो रही इस चर्चा के बीच एक सवाल सबके मन में उठता है कि आखिर इस टैरिफ से अमेरिका को कितनी कमाई होती है. टैरिफ से हो रही कमाई के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद बताया है कि अमेरिका टैरिफ लगाकर रोजाना दो बिलियन डॉलर कमा रहा है. हालांकि, इससे दुनिया के दूसरे देशों को नुकसान हो रहा है. लेकिन इस तरह, अमेरिका का खजाना पूरा भर रहा है.
टैरिफ अमेरिकी उद्योग को मजबूत करने के लिए जरूरीः ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को 'विस्फोटक' बताया है, जिसका मतलब है कि उन्हें लगता है कि इसका प्रभाव बहुत बड़ा होगा. वे व्हाइट हाउस में सांसदों और मंत्रियों के साथ बात करते हुए कह रहे थे कि ये टैरिफ अमेरिकी उद्योग को फिर से मजबूत बनाने के लिए जरूरी हैं.
ट्रंप ने बताया- टैरिफ ने रोज 2 बिलियन डॉलर की हो रही कमाई
उन्होंने बताया कि उन्होंने 60 देशों के खिलाफ टैरिफ बढ़ाने का ऐलान कर दिया है. ट्रंप का कहना है कि इन टैरिफ से अमेरिका को हर दिन 2 बिलियन डॉलर की आमदनी हो रही है. दो बिलियन डॉलर यानी कि 200 करोड़ डॉलर हर रोज. इसे भारतीय मुद्रा में बदले तो यह रकम 1,72,08,38,00,000 रुपए होती है. हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि यह आमदनी किस टैरिफ से आई है और वास्तविक राजस्व कितना बढ़ा है. अमेरिका ने चीन से आने वाले सामान पर 104% तक टैक्स लगाने का फैसला किया है. इसका मतलब है कि चीन से जिन चीजों पर पहले से टैक्स लगता था, अब उसमें 50% और बढ़ोतरी की जाएगी. यह नया टैक्स मंगलवार रात से लागू हो चूका है.
कई देशों ने अमेरिकी श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी की
व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी कामकाजी लोगों और उद्योगों की रक्षा के लिए ये कदम उठाए हैं. इसके कारण दुनिया के कई देशों ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते करने की इच्छा जताई है. प्रवक्ता ने बताया कि कई देशों ने लंबे समय तक अमेरिकी श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी की है, और अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा.

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