जवाबी शुल्क और इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य: भारत में क्या होगा अगला बड़ा कदम?
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा कारों और वाहन कलपुर्जों पर 25 फीसदी आयात शुल्क लगाने के निर्णय से भारत के लिए अपनी वाहन आपूर्ति श्रृंखलाओं में जरूरी बदलाव लाने, खासकर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माण पर फिर से ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी।
ईवाई इंडिया में टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल ने कहा, ‘भले ही भारत का अमेरिका को प्रत्यक्ष कार निर्यात मौजूदा समय में बेहद कम है, लेकिन वैश्विक टैरिफ संबंधित बदलाव वाहन आपूर्ति श्रृंखलाओं को नया आकार देने का एक महत्वपूर्ण अवसर मुहैया कराएगा। हमारी ‘मेक इन इंडिया’ पहल ईवी निर्माण पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किए जाने की वजह से हमें खास स्थान पर रखती है।’ भारत का वाहन कलपुर्जा उद्योग मौजूदा बदलावों से पैदा हुई कमी की भरपाई करने में सफल रह सकता है। यह बदलाव निर्यात को बढ़ा सकता है और घरेलू निर्माण में और ज्यादा निवेश आकर्षित कर सकता है।
हालांकि, इससे एक अलग स्थिति भी पैदा हो सकती है, क्योंकि अमेरिकी कार बाजार वाहन निर्यात के लिए कम आकर्षक हो जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहन या इलेक्ट्रिक वाहन के पुर्जे बनाने वाली कंपनियां, (जिनकी चीन, कोरिया, जापान और वियतनाम जैसे देशों में बड़ी उत्पादन क्षमता है) अपने उत्पादों के लिए नए निर्यात बाजार तलाश सकती हैं। ऐसा नहीं करने पर इन कंपनियों को भारी मात्रा में बेकार पड़े स्टॉक का सामना करना पड़ सकता है। सेंटर फॉर सोशल ऐंड इकनॉमिक प्रोग्रेस (सीएसईपी) में एनर्जी, रिसोर्सेज एवं सस्टेनेबिलटी के फेलो श्यामाशीष दास ने कहा, ‘गुणवत्तापूर्ण ईवी उत्पादों के लिए देश की बढ़ती मांग के कारण ये कंपनियां भारत में अपने उत्पादों, विशेष रूप से ईवी घटकों को तेजी से बेचने की कोशिश करेंगी।’
हाल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी कि सीमा शुल्क टैरिफ को तर्कसंगत बनाने के प्रयास के तहत ईवी बैटरी के लिए 35 पूंजीगत वस्तुओं पर कोई आयात शुल्क नहीं लगाया जाएगा। यह घटनाक्रम एशियाई कंपनियों को अपने उत्पादों को भारत में लाने के लिए प्रेरित कर सकता है। दास के अनुसार, सीधी प्रतिस्पर्धा एक कठिन चुनौती बन सकती है, लेकिन अगर वे इन कलपुर्जों को अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में सफलतापूर्वक शामिल करते हैं, तो उन्हें अपने ईवी या लिथियम-आयन बैटरी को अत्यधिक लागत-प्रतिस्पर्धी बनाने का एक अच्छा मौका मिल सकता है। दास ने कहा, ‘भारत-चीन संबंधों में सुधार के साथ, चीनी कंपनियां भारतीय ईवी बाजार में अधिक रुचि दिखा सकती हैं।’ अन्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव न केवल भारतीय ईवी निर्माताओं के लिए नए दरवाजे खोलेगा, बल्कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में भी मददगार साबित होगा।
वर्ष 2023 में, भारत का ईवी निर्यात सालाना आधार पर 246.3 प्रतिशत बढ़कर 2,139 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो नेपाल और फ्रांस जैसे देशों की मांग से संभव हुआ। भारत का ईवी बाजार वर्ष 2030 तक सालाना 1 करोड़ वाहन तक पहुंचने का अनुमान है। मौजूदा समय में, भारत हर साल लगभग 100,000 ईवी का निर्यात करता है। इसमें मुख्य रूप से दोपहिया और तिपहिया वाहनों के निर्यात का बड़ा योगदान है।
नोमूरा रिसर्च इंस्टीट्यूट कंसल्टिंग एंड सॉल्युशंस इंडिया में सीएएसई (कनेक्टेड, ऑटोनॉमस, शेयर्ड, इलेक्ट्रिक) और अल्टरनेट पावरट्रेन के विशेषज्ञ प्रीतेश सिंह ने कहा कि हालांकि भारत में अपने मौजूदा उत्पादों के साथ अल्पावधि में निर्यात बाजार पर कब्जा करने की क्षमता है, लेकिन यह चीन या उसके विकल्पों को पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं कर सकता है, जब तक कि वह अमेरिका और अन्य वैश्विक बाजारों के मानकों को पूरा करने के लिए अपने उत्पादों की गुणवत्ता में व्यापक सुधार नहीं लाता।

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