Google के खिलाफ CCI का फैसला, जुर्माना अब 216 करोड़ रुपये, आदेश में कोई बदलाव नहीं
राष्ट्रीय कंपनी कानून अपील न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने शुक्रवार को प्ले स्टोर नीतियों से संबंधित दबदबे के दुरुपयोग के लिए गूगल के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के फैसले को आंशिक रूप से बरकरार रखा। एनसीएलएटी ने कहा कि सर्च इंजन दिग्गज ने वास्तव में एंड्रॉयड मोबाइल पारिस्थितिकी तंत्र में अपने दबदबे का दुरुपयोग किया है, विशेष रूप से अपनी प्ले स्टोर बिलिंग प्रणाली के माध्यम से।
मगर एनसीएलएटी ने गूगल पर लगाया गया जुर्माना 936.44 करोड़ रुपये से घटाकर 216 करोड़ रुपये कर दिया। आदेश में कहा गया है, ‘अपीलकर्ता (गूगल) ने मौजूदा अपील में जुर्माने की 10 फीसदी राशि जमा करा दी है तथा जुर्माने की शेष राशि अपीलकर्ता को आज की तारीख से 30 दिनों के अंदर जमा करनी होगी।’
अपने आदेश में एनसीएलएटी ने कहा कि गूगल ऐप डेवलपर्स को इन-ऐप खरीदारी या ऐप खरीदने के लिए किसी भी थर्ड पार्टी बिलिंग/पेमेंट प्रोसेसिंग सेवाओं का उपयोग करने की अनुमति देगा तथा उन्हें ऐसा करने से प्रतिबंधित नहीं करेगा, ऐप डेवलपर्स पर कोई एंटी-स्टीयरिंग प्रावधान नहीं लगाएगा और उन्हें अपने ऐप और पेशकशों को बढ़ावा देने के लिए अपने उपयोगकर्ताओं के साथ संपर्क करने से किसी भी तरह से प्रतिबंधित नहीं करेगा।
एनसीएलएटी ने अपने फैसले में कहा कि गूगल अपने प्लेटफॉर्म पर एकत्र किए गए डेटा, प्लेटफॉर्म द्वारा ऐसे डेटा का उपयोग और ऐप डेवलपर्स या अन्य संस्थाओं (जिसमें संबंधित संस्थाएं शामिल हैं) के साथ ऐसे डेटा की संभावित और वास्तविक साझेदारी पर एक स्पष्ट और पारदर्शी नीति निर्धारित करेगा। जीपीबीएस के जरिये प्राप्त किए गए ऐप्स के प्रतिस्पर्धात्मक रूप से लेनदेन/उपभोक्ता डेटा का गूगल द्वारा अपने प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। गूगल स्पष्ट रूप से भुगतान नीति और शुल्कों की प्रयोज्यता के मानदंड भी प्रकाशित करेगा।
गूगल ने एनसीएलएटी से संपर्क कर सीसीआई के 25 अक्टूबर, 2022 के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसमें उस पर 936.44 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था और गूगल को प्लेस्टोर में आपत्तिजनक गतिविधियों को रोकने और उनसे दूर रहने को कहा गया था।
यह मामला गूगल प्लेस्टोर की नीति से जुड़ा है, जिसके तहत सभी ऐप डेवलपर्स को ग्राहकों से शुल्क लेने के लिए केवल गूगल प्ले के बिलिंग सिस्टम (जीपीबीएस) का उपयोग करना होता है। जीपीबीएस का उपयोग न केवल ऐप से भुगतान प्राप्त करने के लिए किया जाता था, बल्कि इन-ऐप खरीदारी के लिए भी किया जाता था।
गूगल द्वारा 2020 में प्लेस्टोर लेनदेन के लिए 30 प्रतिशत कमीशन लेना शुरू करने के बाद, कुछ ऐप डेवलपर्स ने सीसीआई में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। 11 जनवरी, 2023 को अपीलीय न्यायाधिकरण ने गूगल को राहत नहीं दी और मामले को अप्रैल तक के लिए टाल दिया। इसके बाद गूगल ने एनसीएलएटी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन बाद में उसने अपना मामला वापस ले लिया।

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