सूर्य और चंद्र ग्रहण आखिर क्यों लगता है? बेहद रोचक है राहु-केतु से जुड़ी यह कहानी
साल का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च 2025 को लगेगा. यह आंशिक सूर्य ग्रहण होगा. होली के दिन 14 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगा था. ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना ही नहीं बल्कि ज्योतिष और पौराणिक कथाओं से भी जुड़ा हुआ है. राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा से बदला लेने के लिए उन्हें समय-समय पर ग्रस लेते हैं, जिससे सूर्य और चंद्र ग्रहण की घटना होती है.
समुद्र मंथन और अमृत कलश की कथा
जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तो उसमें से 14 रत्न निकले. इनमें अमृत कलश भी था जिसे पाकर देवता और असुर आपस में लड़ने लगे. इन वस्तुओं को देवताओं और असुरों में बांटने का प्रस्ताव रखा गया. लेकिन असुरों की एक ही इच्छा थी केवल अमृत प्राप्त करना. अन्य कोई भी वस्तु उन्हें उपयोगी नहीं लग रही थी. देवता जानते थे कि अगर असुर अमृत प्राप्त कर लेते हैं तो वे अमर हो जाएंगे और फिर देवता उनसे कभी विजय प्राप्त नहीं कर पाएंगे.
मोहिनी अवतार और अमृत वितरण
इस विवाद को सुलझाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया. मोहिनी के सौंदर्य से मोहित होकर असुर शांत हो गए और उन्होंने अमृत वितरण का कार्य मोहिनी को सौंप दिया. मोहिनी ने कहा-“मैं अपनी इच्छा से अमृत का वितरण करूंगी. अगर तुम मेरी इस शर्त को स्वीकार करते हो तो मैं अमृत बांट सकती हूं.” असुर मोहिनी की बातों में आ गए और उन्होंने अमृत से भरा कलश उसके हाथों में सौंप दिया.
राहु और केतु का जन्म
अगले दिन मोहिनी के आदेशानुसार असुर और देवता अमृत पान के लिए पंक्ति में बैठ गए. मोहिनी अवतार में श्री हरि ने पहले देवताओं को अमृत पान कराना शुरू किया और असुरों को छल से वंचित कर दिया. जब मोहिनी देवताओं को अमृत पिला रही थी,तभी एक असुर, स्वर्भानु को इस छल पर संदेह हुआ. वह देवता का रूप धारण करके उनकी पंक्ति में बैठ गया और अमृत पान करने लगा. देवताओं की पंक्ति में बैठे सूर्य और चंद्रमा ने उसे पहचान लिया और भगवान विष्णु को इसकी जानकारी दी.
इस कारण लगता है सूर्य और चंद्र ग्रहण
इससे क्रोधित होकर,मोहिनी अवतार में श्री हरि विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से स्वर्भानु का सिर धड़ से अलग कर दिया. लेकिन चूंकि उसने अमृत पान कर लिया था इसलिए वह अमर हो चुका था. इसके बाद स्वर्भानु का सिर राहु बन गया. उसका धड़ केतु बन गया. इसी कारण राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं और पूर्णिमा और अमावस्या के दिन ग्रहण लगाते हैं.
क्या 2025 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
29 मार्च 2025 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. 21 सितंबर 2025 का सूर्य ग्रहण भी भारत में नहीं दिखेगा. हालांकि, लोग इसे ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए देख सकते हैं.
सूर्य ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
भारत में सूर्य ग्रहण को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं. माना जाता है कि ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, इसलिए कई लोग विशेष सावधानियां बरतते हैं.
खाने-पीने से बचना: ग्रहण के दौरान भोजन और पानी ग्रहण नहीं करने की परंपरा है, क्योंकि इसे अशुद्ध माना जाता है.
मंत्र जाप करना: इस दौरान गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है.
स्नान करना: ग्रहण से पहले और बाद में स्नान करना पवित्र माना जाता है.
गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां: ऐसा माना जाता है कि गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर के अंदर रहना चाहिए और तेज चीजों (चाकू, कैंची आदि) का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

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