होली खेलने के तुरंत बाद करें चंद्र ग्रहण के ये उपाय, चंडाल समेत कई दोषों से मिलेगी मुक्ति और होगा धन लाभ
होली पर साल का पहला चंद्र ग्रहण लगा था, हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया लेकिन इसका प्रभाव मनुष्य, जीव-जंतु सभी पर पड़ता है और प्रकति में बदलाव देखने को मिलते हैं. कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अनुकूल ना होने से चंद्र ग्रहण के दिन चंडाल दोष लगने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए ग्रहण के खत्म होने के बाद भी कुछ लोगों को सावधानी से रहने की सलाह दी जाती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होली खेलने के बाद चंडाल योग और ग्रहण के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए कुछ विशेष उपाय अवश्य करने चाहिए. ऐसा करने से सभी तरह के दोषों से मुक्ति मिलती है और कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अनुकूल रहती है.
इस उपाय से वातावरण होगा पवित्र
चंद्र ग्रहण के बाद तुरंत घर की साफ सफाई करनी चाहिए और पूरे घर में गंगाजल से छिड़काव भी करना चाहिए. साथ कपूर व सुंगधित धूपबत्ती अवश्य जलानी चाहिए. दरअसल ग्रहण का प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है इसलिए घर की साफ सफाई और कपूर व धूपबत्ती जलाने से वातावरण पवित्र हो जाता है और चंडाल दोष भी दूर हो जाता है.
इस उपाय से दोष होंगे दूर
चंद्र ग्रहण के बाद घर के सभी सदस्य स्नान करें. अगर संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें अन्यथा स्नान के जल में गंगाजल मिला लें. ऐसा करने से ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव दूर होता है और चंद्रमा की स्थिति भी कुंडली में मजबूत होती है, जिससे मन शांत रहता है और हर अधूरे कार्य पूरे होते हैं.
इस उपाय से मिलेगा समाधान
चंद्र ग्रहण के बाद ईश्वर का ध्यान करें और शिवालय में जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें. साथ ही हनुमानजी की पूजा अर्चना करें और सुंदरकांड का पाठ करें. ऐसा करने से चंद्र ग्रहण का अशुभ प्रभाव दूर होता है और सभी समस्याओं का समाधान भी मिलता है.
इस उपाय से होगा फायदा
चंद्र ग्रहण के बाद दान करना बेहद उत्तम माना गया है. दान करने के लिए चंद्रमा से संबंधित चीजें जैसे – कपूर, दही, घी, शक्कर, दूध, सफेद कपड़ा आदि का दान करना चाहिए. साथ ही शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए काले तिल और सरसों का दान भी करना चाहिए. ऐसा करने से सभी दोष दूर होते हैं और नौकरी व कारोबार में फायदा मिलता है.
इस उपाय से मनोकामना होगी पूरी
पूजा, जप-तप व दान करने के बाद गाय माता की सेवा करनी चाहिए. सनातन धर्म में गौ पूजन का विशेष महत्व बताया गया है. गाय माता में 33 कोटी देवी देवता का वास होता है इसलिए गाय की सेवा और जलपान कराने से सभी देवी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है और मनोकामना भी पूरी होती है.

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