लेसोथो पर ट्रंप की टिप्पणी ने दिया झटका, दक्षिण अफ्रीका के बीच घिरा है यह देश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले दिनों जब अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित कर रहे थे तो अपने 90 मिनट के भाषण के दौरान उन्होंने एक देश का जिक्र करते हुए कहा कि उसके बारे में किसी ने नाम तक नहीं सुना. सब हैरान रह गए. जी हां उस देश का नाम लेसोथो है. इस बात से अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से में मौजूद लेसोथो नाराज हैं और उन्होंने ट्रंप की टिप्पणी को अपमानजनक बताया है. वहां के विदेश मंत्री ने पत्रकारों से कहा कि ट्रंप को अपने बारे में बोलना चाहिए न कि इस तरह से हम लोगों पर टिप्पणी करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ट्रंप की टिप्पणी इसलिए आश्चर्यजनक और निराशाजनक है क्योंकि लेसोथो में अमेरिका का दूतावास मौजूद है. उनके मुताबिक दरअसल उनका देश बेहद छोटा और गरीब है शायद इसलिए ट्रंप के लिए महत्वहीन होगा लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति को ये याद रखना चाहिए कि एक दिन उनको लेसोथो की मदद की जरूरत होगी.
दरअसल डोनाल्ड ट्रंप ये कहना चाह रहे थे कि विदेशी सहायता के नाम पर अमेरिका ने इस छोटे अफ्रीकी देश लेसोथो को आठ मिलियन डॉलर की मदद दे दी जबकि लेसोथो का नाम भी दुनिया को नहीं पता. लेसोथो का कहना है कि ऐसा नहीं कहा जा सकता कि लेसोथो को अमेरिका या दुनिया में कोई नहीं जानता. कुछ समय पहले ट्रंप के करीबी एलन मस्क ने अपने स्टारलिंक इंटरनेट सैटेलाइट सर्विस के लिए लेसोथो के प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात की थी.
लेसोथो को यूएसऐड के द्वारा पिछले 20 वर्षों से मदद मिल रही थी. वहां एचआईवी बीमारी के खिलाफ मुहिम में ये वित्तीय मदद दी जा रही थी. अब अमेरिकी मदद रुकने से लेसोथो के करीब सात फीसद हेल्थ स्टाफ की नौकरी खत्म हो जाएगी. तमाम अफ्रीकी देशों की तरह लेसोथो में भी एचआईवी बीमारी की बड़ी समस्या है. इसके खिलाफ लड़ाई के लिए ही ये मदद दी जाती रही है.
लेसोथो
दक्षिण अफ्रीफा से चारों तरफ घिरा स्थलरूद्ध देश लेसोथो है. यहां ब्रिटेन की तरह संवैधानिक राजशाही है. ये दुनिया का इकलौता ऐसा स्वतंत्र देश है जिसकी ऊंचाई समग्र रूप से 1000 मी है. इसके कई गांवों तक केवल घोड़े पर बैठकर या पैदल ही पहुंचा जा सकता है. इसके एयरपोर्ट की एयर स्ट्रिप बेहद संकरी मानी जाती है. इन वजहों से इसको आकाश में स्थित किंगडम कहा जाता है.
पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां खेती-किसानी करना बहुत मुश्किल काम है. यहां के लोग आजीविका के लिए प्रमुख रूप से दक्षिण अफ्रीका जाते हैं. लेसोथो की आबादी करीब 20 लाख है और सांस्कृतिक एवं भाषाई आधार पर ये साउथ अफ्रीका से निकटतम संबद्ध है. साउथ अफ्रीका की 11 आधिकारिक भाषाओं में इनकी सेसोथो भाषा को भी मान्यता मिली है. लेसोथो के लोगों को स्थानीय आधार पर बेसोथो कहा जाता है. सांस्कृतिक रूप से बेसोथो लोगों की पहचान उनके कंबल और विशेष किस्म की टोपी से होती है. उनके राष्ट्रीय झंडे के मध्य में भी इस टोपी को स्थान दिया गया है. ये एक तरीके से उनका राष्ट्रीय प्रतीक है.

धमतरी की स्वर्णिम कृषि यात्रा : आत्मनिर्भरता और समृद्धि के 25 वर्ष
कारखानों में श्रमिकों के नियमित स्वास्थ्य जाँच में नहीं चलेगी मनमानी, श्रम मंत्री देवांगन ने दिए कड़े निर्देश
बालिका सुरक्षा माह के अंतर्गत चलाया जा रहा है जागरूकता कार्यक्रम
बाढ़ में बही पुस्तकें, टेबलेट भी हुआ खराब, पर नहीं रुकेगी पूनम की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी
महिलाओं और बच्चों को मिले आंगनबाड़ी की सभी सेवाओं का लाभ : महिला एवं बाल विकास सचिव शम्मी आबिदी
मंत्रालय में हुआ राष्ट्र-गीत "वंदे-मातरम" एवं राष्ट्र-गान "जन-गण-मन" का सामूहिक गायन
गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : उप मुख्यमंत्री शुक्ल
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की