पैथालाजी केंद्रों में अमानक कैमिकल को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
वरिष्ठ अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता द्वारा दायर जनहित याचिका रू
स्वास्थ्य परीक्षण के मानक निर्धारित न होने को चुनौती
भोपाल। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार क ैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने पैथालाजी केंद्रों में अमानक कैमिकल प्रयुक्त किए जाने के आरोप संबंधी जनहित याचिका पर केन्द्र व राज्य सरकार से जवाब-तलब किया है। इस मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित अन्य को तीन सप्ताह की मोहलत दी है।
जनहित याचिका जबलपुर निवासी हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने दायर की है, उन्होंने अपना पक्ष स्वयं रखा। वरिष्ठ अधिवक्ता गुप्ता ने दलील पेश की है कि, यह मामला वर्ष 2015 से लंबित है। इसके जरिए व्यापक जनहित का मामला उठाया गया है। दरअसल, पैथालाजी में विभिन्न परीक्षणों के लिए जो कैमिकल का उपयोग किया जाता है वह कितना अमानक हैं। यह चिंता का विषय हैं।
परीक्षणों की शुद्धता के लिए यह अनिवार्य है कि कैमिकल उच्च यानि मानक गुणवत्ता के हों। इनके अभाव में परीक्षण रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 2009 में इस सिलसिले में गठित आयोग को मानक तय करने थे। लेकिन इतने वर्ष गुजरने के बावजूद मानक निर्धारण नहीं किये गये। नतीजतन पैथालाजी केंद्रों में अमानक कैमिकल से जांच किए जाने पर अपेक्षाकृत विरोधाभासी रिपोर्ट सामने आ जाती हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।
7 करोड में से सिर्फ 49 ही एनएबीएल से सम्बद्ध

अधिवक्ता गुप्ता ने अवगत कराया कि पैथालाजी केंद्रों को National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories एनएबीएल से सम्बद्धता लेनी होती है। लेकिन आलम यह है कि मध्यप्रदेश में 2017 की स्थिति में सात करोड़ के बीच मात्र 17 पैथालाजी एनएबीएल से सम्बद्ध थीं। कालांतर में यह संख्या 17 से बढ़कर सिर्फ 49 हुई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी कितनी बड़ी संख्या में असम्बद्ध पैथालाजी केंद्र संचालित हैं। लिहाजा, एनएबीएल से उठाए गए कदमों की जानकारी तलब की जानी चाहिए।

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