फर्जीवाड़े के आरोपों से घिरी IAS पूजा खेडकर को सुप्रीम कोर्ट से राहत, 17 मार्च तक गिरफ्तारी पर रोक
बर्खास्त IAS पूजा खेडकर की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक सुप्रीम कोर्ट ने आगे बढ़ा दी है. फर्जीवाड़ा कर आईएएस बनने की आरोपी पूजा की अग्रिम जमानत याचिका पर जवाब देने के लिए दिल्ली पुलिस ने अतिरिक्त समय की मांग की. इसे स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 17 मार्च तय कर दी. जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि तब तक पूजा की गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी.
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देने से मना करते हुए कहा था कि यह सिर्फ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के साथ ही नहीं, देश के आम लोगों के साथ भी धोखा है. सिविल सर्विस का हिस्सा बनने के लिए पूरी मेहनत से प्रयास करने वाले युवाओं के हित के लिए भी यह जरूरी है कि मामले की विस्तृत जांच हो. 23 दिसंबर के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची पूजा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और यूपीएससी को नोटिस जारी कर रखा है.
पूजा खेडकर पर फर्जी ओबीसी सर्टिफिकेट बनवाने, अपने नाम मे बदलाव कर धोखाधड़ी करने और विकलांगता का झूठा प्रमाण पत्र देकर यूपीएससी में चयन की पात्रता हासिल करने जैसे कई आरोप हैं. 2022 में आईएएस चुनी गईं पूजा को पुणे में असिस्टेंट कलेक्टर के तौर नियुक्ति मिली थी. वहां उन पर एडिशनल कलेक्टर के दफ्तर पर कब्जा करने, निजी गाड़ी पर सरकारी बत्ती लगाने जैसी कई अनुशासनहीनता भरी हरकतों का आरोप लगा. पुणे के कलेक्टर की तरफ से सरकार को शिकायत भेजने के बाद मामला चर्चा में आया.
यूपीएससी ने भी अपने स्तर पर जांच की. इसमें पाया गया कि 2012 से 2020 के बीच पूजा ने 9 बार यूपीएससी परीक्षा दी. 9 बार की अधिकतम सीमा खत्म हो जाने के बाद भी 2022 में फर्जीवाड़ा कर अपना चयन करवाया. इस दौरान उन्होंने नाम में बदलाव, फर्जी ओबीसी सर्टिफिकेट, आमदनी और संपत्ति का गलत ब्यौरा देने, विकलांगता का झूठा दावा करने जैसे कई तरह का भ्रष्ट आचरण किया. इस जांच के बाद यूपीएससी ने पूजा को सिविल सेवा से बर्खास्त कर दिया था. मामले में यूपीएससी ने दिल्ली पुलिस में एफआईआर भी दर्ज करवाई थी.

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