मां धूमावती को प्रसन्न करने इस मंत्र का करें जाप, हर बाधा से मिलेगी मुक्ति
हिन्दू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है. नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के 9 रूपों की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है. नवरात्रि के दिनों में भगवती मां दुर्गा पूरे नौ दिन तक धरती पर आकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज ने बताया कि गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन किस देवी की उपासना की जाए.
शास्त्रों के अनुसार, सती प्रसंग के अनुसार भगवान शंकर को उनके ससुर यानी राजा दक्ष ने यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया. उनकी पत्नी सती ने जिद की कि वह अपने पिता के यहां यज्ञ में अवश्य जाएंगी. शंकर जी ने बहुत मना किया, लेकिन वह नहीं मानी और वहां चली गई. वहां उनको अपमान से तिरस्कृत होना पड़ा. देखते ही देखते उन्होंने यज्ञ कुण्ड में जान दे दी .यज्ञ की अग्नि बुझ गई. उस धुएं से एक शक्ति प्रगट हुई जो धूमावती थीं. धुएं के रूप में बाहर आने पर यही शक्ति धूमावती कहलाई गई. दूसरा प्रसंग भी इसी के साथ जुड़ा है. कहते हैं कि भगवान शंकर से विरक्त होने के कारण वह धूमावती हुईं. इसलिए, उनका एक स्वरूप विधवा का भी है.
मां धूमावती की पूजा विधि
मां धूमावती की गुप्त नवरात्रि में पूजा करना अत्यन्त लाभकारी माना जाता है. यह भी तंत्र साधना में विश्वास रखने वालों के लिए बहुत महत्वपूण शक्ति मानी गई है. मां धूमावती की पूजा करने से पहले स्नान कर काले रंग के वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करके जल, पुष्प, सिन्दूर, कुमकुम, अक्षत, फल, धूप, दीप तथा नैवैद्य आदि से मां का पूजन करना चाहिए. इसके बाद मां धूमावती की कथा सुननी चाहिए. पूजा के पश्चात अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए मां से प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए.
मां धूमावती का मंत्र
ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्।
धूं धूं धूमावती ठ: ठ:।।
मां धूमावती के इस मंत्र का जाप कम से कम 21, 51 या 108 बार करने से मां प्रसन्न होती है और अपने भक्तों पर कृपा भी बरसाती हैं.

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