6 घंटे की नींद भी पर्याप्त, 9 घंटे से ज्यादा बन सकता है कैंसर के खतरे का अलार्म
इंदौर: बदलती जीवनशैली हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है। हर साल प्रदेश में कैंसर समेत गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। अगर इंदौर जिले की बात करें तो यहां हर साल करीब 30 हजार कैंसर के मरीज सामने आ रहे हैं। कैंसर के खतरे के कई कारण हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह रहस्य उलझा हुआ है कि आखिर कैंसर का कारण क्या रहा? इसका संबंध जीवनशैली और मिलावट से भी है। विशेषज्ञों के ताजा अध्ययन में अपर्याप्त नींद भी कैंसर के खतरे के रूप में सामने आई है। उनकी राय में स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त नींद जरूरी है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी ने कैंसर के खतरे को लेकर आगाह करते हुए इस बात की भी जरूरत बताई कि इस दिशा में और शोध किए जाने चाहिए।
स्थानीय विशेषज्ञ के मुताबिक कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि नींद की समस्या होने पर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। पर्याप्त नींद से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जबकि नींद की समस्या से रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। इसके कमजोर होने पर कोशिका तंत्र गड़बड़ा जाते हैं 6 घंटे से कम और 9 घंटे से ज़्यादा सोना इम्यूनिटी सिस्टम के लिए ख़तरनाक है. सांस लेने में रुकावट से भी गंभीर बीमारी का ख़तरा बढ़ जाता है।
कुछ ऐसे ख़तरे हैं जैसे
कम नींद: हर रात 6 घंटे से कम सोने वाले व्यक्ति को ब्रेस्ट, आंत, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर का ख़तरा होता है.
ज़्यादा नींद: 9 घंटे से ज़्यादा सोना भी ख़तरे का संकेत है. इससे ओवेरियन और थायरॉइड कैंसर का डर रहता है.
मेलाटोनिन में कैंसर से बचाव के गुण
वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. दिगपाल धारकर के अनुसार, अपर्याप्त नींद से हॉरमोनल चक्र बाधित हो सकता है. हॉरमोन कैंसर को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं. हालांकि, अभी तक इसके कोई ठोस सबूत नहीं हैं. मेलाटोनिन हॉरमोन रात में सोते समय बनता है. इसे कैंसर से बचाव के गुण माना जाता है. रात में रोशनी के संपर्क में आने या अनियमित नींद से मेलाटोनिन का स्तर कम हो जाता है, जिससे कैंसर का ख़तरा बढ़ सकता है. रात में पर्याप्त नींद लेना ज़रूरी है।

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