हाईकोर्ट ने स्कूलों में शौचालय नहीं होने और दुर्दशा को लेकर जताई नाराजगी, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से मांगा जवाब
बिलासपुर । सरकारी स्कूलों में शौचालय नहीं होने और जिन स्कूलों में शौचालय है उसे उपयोग लायक नहीं होने संबंधी खबर अखबार में प्रकाशित हुई थी। जिसे हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की है। इतना ग्रांट मिलने के बावजूद भी ऐसी स्थिति को हाईकोर्ट ने गंभीर माना है और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र देने के निर्देश दिए है।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों में शौचालय नहीं होने और मौजूद शौचालय को इस्तेमाल लायक नहीं होने को लेकर मीडिया रिपोर्ट को स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई के दौरान नाराजगी जताई है। कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को इस मामले में कहा ये कितनी गलत बात है..? कैसे यह हो रहा है..? इतने ग्रांट मिलने के बावजूद भी ऐसा हो रहा है..? वही इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस देकर व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने कहा है। अगली सुनवाई 10 फरवरी को है।
दरअसल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के एक अखबार में प्रकाशित खबर को संज्ञान लिया है। जिसमें कहा गया था कि 76 वाँ गणतंत्र दिवस मना रहे हैं, पर तस्वीर बदलना चाहिए। इस मीडिया रिपोर्ट में इस बात को भी बताया गया कि 150 स्कूलों में टॉयलेट नहीं है और 216 से ज्यादा बेहद खराब हैं। वहीं यूरिनल इन्फेक्शन की जानकारी भी प्रकाशित की गई। मामले की अगली सुनवाई दस फरवरी को रखी गई है।
इस मामले को स्वत: संज्ञान लेकर हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के रूप में प्राथमिकता में दर्ज किया है। सोमवार को चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश रविन्द्र कुमार अग्रवाल की बैंच में सुनवाई हुई। जिसमें मुख्य न्यायाधीश ने इस मीडिया रिपोर्ट को लेकर राज्य सरकार पर नाराजगी जताई और शासन का पक्ष रखने वाले महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत को कहा ये देखिए कितनी गलत बात है..? वह इस पूरे मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने का आदेश दिए हैं। वहीं अगली सुनवाई 10 फरवरी 2025 को निर्धारित भी की है।

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