राष्ट्रीय खेल पुरस्कार समारोह में मनु भाकर और डी गुकेश को मिला मेजर ध्यानचंद खेलरत्न सम्मान
Major Dhyan Chand Khel Ratna Award: राष्ट्रीय खेल पुरस्कार समारोह शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया, जहां खेल जगत के कुछ प्रमुख खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मेजर ध्यानचंद खेलरत्न पुरस्कार से दो ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर और शतरंज के विश्व चैंपियन डी गुकेश को सम्मानित किया गया। इन दोनों खिलाड़ियों को तालियों की गड़गड़ाहट के बीच इस सम्मान से नवाजा गया, जो उनकी कड़ी मेहनत को दर्शा रहा है। मनु भाकर ने ओलंपिक में देश का नाम रोशन किया है, जबकि डी गुकेश शतरंज ने हाल ही में चेस चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया था।
हरमनप्रीत को भी किया गया सम्मानित
इसके अलावा, भारतीय मेंस हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह को भी देश के सर्वोच्च खेल सम्मान से नवाजा गया। हरमनप्रीत सिंह टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा थे और पेरिस ओलंपिक में उन्होंने टीम का नेतृत्व भी किया। उनके नेतृत्व में भारतीय हॉकी ने बड़ी सफलता हासिल की, और वह इस सम्मान के पूरे हकदार भी हैं।
पैरा एथलीटों को भी मिला सम्मान
इसी समारोह में पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता हाई जंप के खिलाड़ी प्रवीण कुमार को भी मेजर ध्यानचंद खेल रत्न सम्मान दिया गया। प्रवीण कुमार ने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीता था और पेरिस ओलंपिक में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया, जो उनके समर्पण और कड़ी मेहनत का प्रतीक है। उनका जीवन काफी संघर्षों से भरा रहा है, विशेष रूप से उनके जन्म से जुड़े शारीरिक विकार के बावजूद उन्होंने जो उपलब्धियां प्राप्त की हैं, वे काफी प्रेरणादायक हैं।
अर्जुन पुरस्कार से 32 खिलाड़ियों को सम्मानित
इस बार 32 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिनमें से 17 पैरा एथलीट थे। अर्जुन पुरस्कार पाने वालों में पेरिस ओलंपिक कांस्य पदक विजेता पहलवान अमन सेहरावत, निशानेबाज स्वप्निल कुसाले, सरबजोत सिंह, और मेंस हॉकी टीम के सदस्य जरमनप्रीत सिंह, सुखजीत सिंह, संजय और अभिषेक शामिल थे। इन खिलाड़ियों की सफलता से यह साबित होता है कि भारतीय खेल जगत में लगातार सुधार की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इन खिलाड़ियों ने अपनी कड़ी मेहनत, समर्पण और संघर्ष से देश को गर्व महसूस कराया है और उनकी उपलब्धियां न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम हैं, बल्कि भारतीय खेल संस्कृति की मजबूत नींव का भी प्रतीक हैं।

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